क्या टीवी स्क्रीन पर दिखाई गई वह मासूम और प्यारी छवि वास्तविक जीवन की पूरी कहानी बयान करती है? 'दिल से दिल तक' सीरियल में सिद्धार्थ शुक्ला की मां का किरदार निभाने वाली वैष्णवी मैकडोनाल्ड ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कुछ ऐसे दावे किए हैं, जो शोबिज की चकाचौंध के पीछे छिपे एक कड़वे सच को उजागर करते हैं।

उनके अनुसार, सिद्धार्थ शुक्ला सेट पर अपनी सह-कलाकारों रश्मि देसाई और जैस्मिन भसीन के साथ अक्सर अपमानजनक और भद्दी भाषा का इस्तेमाल करते थे, जो बिग बॉस में दिखाई गई उनकी 'स्वीट बॉय' इमेज से एकदम उलट था।
शुरुआती छाप: एक 'क्यूरियस और समझदार' सिद्धार्थ
वैष्णवी याद करती हैं कि शूटिंग के पहले दिन सिद्धार्थ उनसे मिले थे और वे जिज्ञासु और समझदार लगे थे। लेकिन यह छवि जल्द ही धुंधली पड़ने लगी। वे कहती हैं, "सच कहूं तो बिग बॉस में उनकी जो छवि दिखाई गई, वो असल में वैसी नहीं थी। उन्हें बहुत अच्छे और स्वीट लड़के की तरह दिखाया गया। शहनाज गिल के साथ उनकी क्यूट लव स्टोरी दिखाई गई, जिससे कहानी का रुख बदल गया।"
रश्मि देसाई और जैस्मिन भसीन के साथ व्यवहार: क्या था सच?
वैष्णवी के अनुसार, सेट पर सिद्धार्थ का व्यवहार महिला सह-कलाकारों के प्रति सम्मानजनक नहीं था। वे बताती हैं:
- भद्दी भाषा का इस्तेमाल: "मैंने कभी [रश्मि] को सेट पर गलत व्यवहार करते नहीं देखा... लेकिन सिद्धार्थ बहुत भद्दे शब्दों का इस्तेमाल करते थे।"
- टारगेट करने की रणनीति: "वो रश्मि और जैस्मिन दोनों के साथ कभी दोस्त बनते, कभी किसी एक के साथ मिलकर दूसरी को टारगेट करते।"
- रैगिंग जैसा माहौल: सेट पर अक्सर रैगिंग और गंदी भाषा का इस्तेमाल होता था, और यह सब सबके सामने होता था।
वैष्णवी का मानना है कि एक नैरेटिव बनाया जा रहा था जिसमें रश्मि देसाई को ही समस्या का मूल बताया जा रहा था, जबकि हकीकत कुछ और थी।
चुप रहने का दबाव: एक ऑन-स्क्रीन मां की दुविधा
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर यह सब सबके सामने हो रहा था, तो वैष्णवी या अन्य लोगों ने आवाज क्यों नहीं उठाई? वैष्णवी इसके लिए कई कारण बताती हैं:
- मजाक समझने की गलतफहमी: उन्हें लगता था कि शायद रश्मि और जैस्मिन सिद्धार्थ के व्यवहार को मजाक में लेती थीं।
- प्रोडक्शन को नुकसान का डर: उन्होंने खुद इस व्यवहार को नजरअंदाज किया ताकि शो के प्रोड्यूसर या चैनल को कोई नुकसान न हो।
- अजीब और असहज महसूस करना: पूरा माहौल उन्हें अजीब लगता था, और वे खुद एक नई जगह पर थीं।
वे एक घटना याद करते हुए बताती हैं कि एक बार उनका शॉट तैयार था, लेकिन सिद्धार्थ गुस्से में उन्हें देख रहे थे, जिससे वे डर गईं।
सेट से निकाले जाने और वापसी का मामला
वैष्णवी ने यह भी खुलासा किया कि एक समय ऐसा भी आया था जब सिद्धार्थ के व्यवहार के चलते उन्हें सेट से बाहर जाने को कहा गया था। हालांकि, [एक विश्वसनीय स्रोत के अनुसार], बाद में चैनल की मांग पर उन्हें वापस बुला लिया गया। यह घटना यह सवाल खड़ा करती है कि टीआरपी और स्टार पावर के आगे कभी-कभी नैतिक मानदंड पीछे छूट जाते हैं।
मुख्य बातें: इस पूरे विवाद से क्या सीख मिलती है?
- छवि और यथार्थ में अंतर: टीवी या रियलिटी शो में दिखाई गई छवि हमेशा किसी व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व को नहीं दर्शाती।
- वर्कप्लेस की संस्कृति: मनोरंजन उद्योग में भी वर्कप्लेस की गरिमा और सम्मान महत्वपूर्ण है, और टॉक्सिक बिहेवियर को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
- मूक दर्शक की भूमिका: वैष्णवी की कहानी यह भी दिखाती है कि कैसे सिस्टम और डर के चलते लोग गलत होते देखकर भी चुप रह जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. वैष्णवी मैकडोनाल्ड कौन हैं और उन्हें सिद्धार्थ शुक्ला के बारे में बोलने का अधिकार क्यों है? वैष्णवी मैकडोनाल्ड एक अनुभवी अभिनेत्री हैं जिन्होंने सिद्धार्थ शुक्ला के साथ 'दिल से दिल तक' सीरियल में उनकी मां का किरदार निभाया था। वे सेट पर मौजूद रहीं और घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी थीं, इसलिए उनके अनुभव महत्वपूर्ण हैं।
2. क्या सिद्धार्थ शुक्ला वाकई सेट से निकाले गए थे? वैष्णवी मैकडोनाल्ड के दावे के अनुसार, एक समय पर उनके व्यवहार के कारण उन्हें सेट से बाहर जाने को कहा गया था, लेकिन बाद में चैनल की मांग पर वापस बुला लिया गया।
3. रश्मि देसाई और जैस्मिन भसीन ने इन दावों पर क्या कहा है? इस लेख के लिखे जाने तक, रश्मि देसाई या जैस्मिन भसीन ने वैष्णवी मैकडोनाल्ड के इन विशिष्ट दावों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
4. क्या बिग बॉस में सिद्धार्थ शुक्ला की छवि पूरी तरह से गलत थी? वैष्णवी का दावा है कि बिग बॉस में दिखाया गया 'स्वीट बॉय' वाला पहलू उनके सेट पर देखे गए व्यवहार से मेल नहीं खाता। हालाँकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि कोई भी रियलिटी शो किसी व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व को नहीं दिखा सकता।
अंतिम विचार: एक जटिल विरासत पर पुनर्विचार
सिद्धार्थ शुक्ला की अकाल मृत्यु ने उनके प्रशंसकों के दिलों में एक गहरा दर्द छोड़ा है। वैष्णवी मैकडोनाल्ड के ये दावे हमें यह याद दिलाते हैं कि हर सार्वजनिक व्यक्ति के जीवन के कई पहलू होते हैं। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में नहीं, बल्कि एक पूरी इंडस्ट्री की वर्क कल्चर के बारे में है, जहाँ स्टारडम कभी-कभी जवाबदेही पर भारी पड़ जाता है। एक दर्शक, प्रशंसक या सहकर्मी के तौर पर, हमारा कर्तव्य है कि हम तथ्यों को सुनें, संदर्भ को समझें और एक ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करें जहाँ हर किसी का सम्मान सर्वोपरि हो। क्या आपको लगता है कि सेट पर ऐसे व्यवहार को रोकने के लिए और कड़े नियम होने चाहिए? नीचे कमेंट में अपनी राय साझा करें।