कैलाश - ब्रह्मांड का सबसे रहस्यमयी पर्वत (Kailash - The Most Mysterious Mountain in the Universe)

इस ब्रह्माण्ड में बहुत सारी ऐसी जगह होंगी जहां पर पहुंचना असंभव है, मानव जीवन की बात करें तो धरती तक ही सीमित है। पूरी तरह से इस धरती के रहस्यों से ही मानव जाति अभी तक अनभिज्ञ है ब्रह्मांड तो एक व्यापक रहस्य है।

Kailash Mountain Photo

अगर विज्ञान के आधार पर देखें तो बहुत सारी थ्योरी हैं जो अधूरी हैं और सटीक उत्तर नही है वहीं वैदिक पुराणों की बात करें तो कई बाते निकल कर आती हैं लेकिन सटीक तरह से समझने का आभाव है खैर पृथ्वी में ही कई जगह ऐसी मौजूद हैं जिनका रहस्य सुलझ नहीं पाया ऐसी ही एक जगह है Kailash Parvat.

इस लेख के माध्यम से जानते और समझते हैं Kailash Mountain ke Bare me पौराणिक महत्त्व,वैज्ञानिक महत्त्व से लेकर kailash parvat के रहस्य तक।

कैलाश पर्वत - The Kailasha Mountain

कैलाश पर्वत हीरा और पिरामिडनुमा आकार का अद्वितीय अप्रतिम पहाड़ है जो हिम से लगभग अच्छादित रहता है, इस पर्वत की परिधि की बात करें तो लगभग 52 किलोमीटर का मार्ग तय करना पड़ेगा इसके पूरे चक्कर लगाने में,इस माउंटेन (Kailash Mountain Height) की हाइट लगभग 6638 या 21788 फुट है। इसे शिव पिरामिड,अष्टापद,राजतगिरी,गणपर्वत और तिब्बती भाषा में गंग रिपोचे नाम से भी जाना जाता है।

कैलाश पर्वत कहां स्थित है - Where is Mount Kailash Located

कैलाश पर्वत वर्तमान में भारत के उत्तर दिशा में स्थित हिमालयन पर्वत के ट्रांसहिमालय(Trans Himalaya)श्रेणी में स्थित है जो कि वर्तमान में तिब्बत  के अंतर्गत आता है। कैलाश के पश्चिम में मानसरोवर झील है इसी झील का उल्लेख पुराणों में मिलता है कि माता पार्वती इसी सरोवर में स्नान करती थीं। और दक्षिण की दिशा में एक झील है जिसे राक्षसताल झील कहा जाता है। यहां से यह स्थल सिन्धु,सतलज,गंगा,ब्रम्हपुत्र नदियों का उद्गम स्थान है।

कैलाश पर्वत का पौराणिक मान्यता और धार्मिक इतिहास (Mythological belief and religious history of Mount Kailash)

Kailash पर्वत का भारतीय सनातन संस्कृति और परंपरा में बहुत ही खास और पवित्र स्थान है हिन्दू,जैन,बौद्ध और सिख धर्मो में इसे धार्मिक माना जाता है। हिंदुओं में इसे भगवान शिव अर्थात भोलेनाथ का निवास स्थान माना जाता है कैलाश के ऊपर स्वर्ग लोक और नीचे मृत्युलोक स्थित है,पौराणिक कथाओं में कैलाश से संबंधित अनेकों आलेख पढ़ने को मिलते हैं। आदि संतों से लेकर देवतागण, राक्षस राज रावण हो या भस्मासुर इन सभी की शक्ति का स्रोत कैलाश ही रहा है क्योंकि इन सभी ने यहीं पर तपस्या कर अपनी शक्ति अर्जित की है।

kailash mountain beliefs photo

कुबेर की नगरी इसी पर्वत के आसपास बताई जाती है भगवान शिव ने माता गंगा को इसी स्थान पर अपनी जटाओं में स्थान दिया था, मत्स्य पुराण,शिव पुराण आदि में कैलाश का वर्णन अनेकों खंडों में व्यापक रूप से वर्णित है इन्ही ग्रंथो के आधार पर माना जाता है कि भगवान विष्णु का अस्थायी निवास क्षीर सागर कैलाश से कुछ कोसों की दूरी पर है जहां से जगतपिता इस संसार का संचालन करते हैं। माता सती के शरीर के 64 हिस्सों में इसी पर्वत पर उनका हांथ गिरा था ऐसी मान्यता है।

जैन धर्म में कैलाश पर्वत को अष्टापद अर्थात आठ चरणों वाला कहा गया है ऐसी मान्यता है कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने यहां मोक्ष प्राप्त किया था,हालांकि अष्टापद 4400 मीटर पर कैलाश स्थित एक स्थान है। अष्टापद नाम के पीछे ऐसा माना जाता है कि भगवान ऋषभदेव ने कैलाश पर्वत की यात्रा को मात्रा आठ कदमों में पूरा किया था

बौद्ध धर्म में भी कैलाश का बहुत ही अनूठा महत्त्व है बुद्ध को मानने वाले इस पर्वत को पृथ्वी का केंद्र मानते हैं और धरती के स्वर्ग से संबोधित करते हैं बुद्ध का निवास स्थान कैलाश को माना जाता है बुद्धिष्ट ऐसा मानते हैं कि इस पर्वत के बीचों बीच एक ऐसा स्थान है जहां एक कल्पवृक्ष है जो सबकी इच्छाओं की पूर्ति कर सकता है,बौद्ध संत मिलरेपा 11th शताब्दी में इस स्थान में कई वर्षों तक रहे थे।

सिख धर्म के इतिहास में गुरु नानक देव के बारे में जिक्र किया गया है कि उन्हें इसी स्थान पर रहकर ज्ञान की प्राप्ति हुई है तब से सिख धर्म के प्रवर्तक इस स्थान को बहुत ही धार्मिक और अलौकिक मानते हैं।

कैलाश पर्वत का श्लोकों में वर्णन (Description of Mount Kailash in Verses)

पौराणिक कथाओं में कैलाश का महत्त्व अत्यंत पवित्र और उल्लेखनीय है क्योंकि कैलाश का संबंध देवों के देव महादेव से है और इस जगत का अस्तित्व महादेव से हैं। कुछ श्लोकों के माध्यम से कैलाश का जिक्र किया गया है।

kailash mountain shlok and meaning photo

हेमकूटस्तु सुमहान कैलासो नाम पर्वतः यत्र वैश्रवणो राजन् गुह्यकैः सह मोदते ।।

                 अर्थात

कैलाश का दूसरा नाम हेमकूट है। यह यक्षों का श्रेष्ठ निवास स्थान है।(महाभारत का भीष्म पर्व)

kailash shlok and meaning hindi photo

अस्तयातिक्रम्यं शिखरं कैलासम्य युधिष्ठिर, गति परमसिद्धानां देवर्षीणीं प्रकाशते ।।

              अर्थात

हे युधिष्ठिर,कैलाश पर्वत के शिखर तक पहुंचना मात्र देवर्षि की गति से ही संभव है।

शिवजी की आरती में कैलाश- शीश गंग अर्धंग पार्वती,

सदा विराजत कैलासी ।

नंदी भृंगी नृत्य करत हैं,

धरत ध्यान सुर सुखरासी ॥ 

भगवान कल्कि और कैलाश का संबंध - Kalki And Kailash

कल्कि पुराण या भविष्य पुराण में यह विदित है कि भगवान कल्कि का अवतार किसी "सम्हाला" नामक गांव में होगा,और यह सम्हाला गांव कैलाश में ही स्थित है,भगवान कल्कि यहीं जन्म लेकर कलयुग का अंत करेंगे।

इसी सम्हाला का वास्तविक नाम "ज्ञानगंज" है जहां पर महावतार बाबा जी से लेकर गौतम बुद्ध और चिरंजीवी विराजित हैं

कैलाश पर्वत पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण - Scientific perspective on Mount Kailash

अनुमानतः 50 लाख साल पहले इंडियन और यूरेशियन प्लेटों के टकराने से कई लाखों सालों के बाद हिमालयन पर्वत श्रृंखला का जन्म हुआ और इसी हिमालय के एक भाग ट्रांस हिमालय में कैलाश पर्वत स्थित है।

वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार Kailash Parvat मे रेडियो तरंगे एक्टिव हैं जिसकी वजह से वहां पर पहुंचने वाले व्यक्तियों के बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं और मनुष्य सुप्त अवस्था में जाने लगता है ऐसा माना जाता है कि जीवित व्यक्ति का वहां पहुंचना असंभव है।

1999 में रूस के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की टीम ने यहां शोध में पाया कि यह एक पिरामिड नुमा आकर का है जो और कई तरह के पिरामिडों से ढका हुआ है इसे उन्होंने ने भगवान शिव के नाम से "शिव पिरामिड" भी कहा है।वैज्ञानिक कैलाश को धरती का केंद्र बिन्दु मानते हैं।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने बताया कि इस पर्वत पर 7 प्रकार की रोशनी दिखती है इसके पीछे के विज्ञान के बारे में बताया कि विशेष प्रकार के चुंबकत्व की वजह से ऐसा होता है।

विज्ञान मानता है कि इस अनोखे पर्वत से "ॐ" जैसी ध्वनि सुनाई देती है और इसके पीछे का कारण वहां पर चलने वाली हवाएं जो बर्फ से टकराने से ध्वनि आती है।

कैलाश पर्वत जाने का रास्ता - Road to Kailash Mountain

कैलाश जाने के भाग भारत के राज्य उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से लिपुलेख पर्वत श्रेणी से होकर जाना होता है हालांकि लिपुलेख (Lipulekh) श्रेणी के पास से कैलाश पर्वत के दर्शन करे जा सकते हैं।

1962 तक कैलाश पर्वत भारत के हिस्से में था लेकिन चीन के युद्ध के बाद यह चीन के कब्जे वाले तिब्बत क्षेत्र में है कैलाश और मानसरोवर की यात्रा के लिए चीन के वीजा की जरूरत पड़ती है।

नेपाल के रास्ते जाएंगे तो लखनऊ से इसकी यात्रा शुरू होगी यह ज्यादातर हेलीकॉप्टर से होगी।

वहीं अगर उत्तराखंड से तो लिपुलेख दर्रे से लगभग 200 किलोमीटर की ट्रैकिंग और सिक्किम के नाथुला (Nathula) दर्रा से 40 किलोमीटर की ट्रैकिंग होती है बाकी यात्रा बसों से होती है खर्च लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख के बीच होता है।

कैलाश पर्वत के रहस्य - Mysteries of Mount Kailash

fact kailash mountain photo

कैलाश पर्वत से ऊंचा पर्वत माउंटएवरेस्ट (Mount Everest)है लेकिन वहां कई पर्वतारोही आसानी से चढ़ जाते हैं लेकिन यह रहस्यमई पर्वत कई तरह के रहस्यों को छोड़ता है जिसका पता लगा पाना लगभग असम्भव सा प्रतीत होता है।

  • इस स्थान के आसपास से डमरू और ॐ(om) की ध्वनि सुनाई देती है
  • बौद्ध संत मिलारेपा(Milarepa)के अलावा कोई भी आज तक इस पर्वत पर चढ़ नही पाया है।
  • इस पर आरोहण करने वाले कई आरोही दल आज तक वापस नहीं लौटकर आए हैं।
  • रूस के एक पर्वतारोही(Mountaneer)ने साझा किया कि जब वह इस पर्वत पर चढ़ रहे थे तो अचानक दिल की धड़कन तेज हो गई,कमजोरी महसूस होने लगी और ब्रेन ऐसा लग रहा था कि किसी और के कंट्रोल मे है।
  • कर्नल जे सी विल्सन (J.C Wilson)ने बताया कि जब वह पर्वत पर चढ़ने के प्रयास में थे तब इतनी बर्फबारी हुई की उन्हें वापस होना पड़ा।
  • ऐसा मान्यता है कि कैलाश पर हिम मानव (Yeti) रहता है।
  • कैलाश में 7 प्रकार की रोशनियों का दिखने के पीछे का कारण आज भी रहस्य है।
  • इसके पास स्थित दो झीलें ब्रम्हताल का पानी मीठा वहीं राक्षस ताल का पानी खारा है इसके पीछे का कारण आज तक रहस्य है।
  • कैलाश पर्वत का आकार अपने आप में रहस्य है क्योंकि कई पिरामिडों से ढका हुआ प्रतीत होता है।

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कैलाश पर्वत से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - Kailash Parvat FAQ

कैलाश पर्वत भारत के लगभग सारे धर्मों का दार्शनिक स्थान के साथ आध्यात्मिक केंद्र है अतः अकसर लोगों के मन में कई प्रकार के प्रश्न शंका उत्पन्न करते हैं और जानकारी के लिए आप इन्हे पढ़ सकते हैं।

क्या इंसान कैलाश पर्वत पर जा सकता है?

अभी तक बहुत देशों के लोग प्रयास कर चुके हैं कोई सफल नहीं हुआ।

कैलाश पर्वत कौन से देश के अंदर है?

तिब्बत में स्थित है।

कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति क्यों नहीं है?

धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं।

कैलाश पर्वत पर नासा ने क्या पाया?

7 प्रकार के प्रकाशों का प्रतिबिंब

कैलाश पर्वत के ऊपर में क्या है?

ऊपर स्वर्ग और नीचे मृत्युलोक है।

कैलाश पर्वत पर किसका निवास है?

हिंदुओं की मान्यता अनुसार भगवान भोलेनाथ का स्थान है।

कैलाश पर चढ़ने वाला पहला व्यक्ति कौन है?

ऐसा माना जाता है कि बौद्ध संत मिलेरेपा 11वीं शताब्दी में चढ़े थे।

कैलाश पर्वत कितने साल का है?

कैलाश पर्वत हिमालयन श्रृंखला का हिस्सा है विज्ञान अनुसार करीब 30 मिलियन साल पुराना माना जाता है।

कैलाश पर्वत के अन्य नाम क्या है?

अष्टापद, गणपर्वत, राजतगिरि।

क्या वेदों में कैलाश का उल्लेख है?

वेदों में इसे हिमवंतो भी कहा गया है कई बार कैलाश का उल्लेख है।

भारत में कितने कैलाश पर्वत है?

भारत और तिब्बत में पांच कैलाश है जिन्हें पंच कैलाश कहा जाता है।

चीन ने कैलाश पर्वत पर प्रतिबंध क्यों लगाया?

तिब्बती लोगों की धार्मिक आस्था को देखते हुए चीन ने प्रतिबंध लगा दिया है।

छोटा कैलाश कहां है?

छोटा कैलाश पिथौरागढ़ उत्तर प्रदेश में स्थित है।

कैलाश पर्वत की ऊंचाई कितनी है?

6638 मीटर

कैलाश पर्वत पर किसका अधिकार है?

तिब्बत और चीन

कैलाश पर्वत कहां स्थित है?

तिब्बत में चीन के अधिकार क्षेत्र में।

भारत से कैलाश पर्वत कैसे पहुंचे?

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) के जरिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा आईटीबीपी के आदेशानुसार कर सकते हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर कितना खर्च आता है?

1.85 लाख

निष्कर्ष

हिमालयन बेल्ट धरती का हर तरह से केंद्र है चाहे ज्ञान हो या रहस्य और बात अगर कैलाश की हो तो सीधे ध्यान भगवान शंकर पर जाता है और महादेव ज्ञान और ध्यान के महापुंज हैं। अध्यात्म हो या भौतिक जीवन कैलाश से बहुत कुछ सीखा जा सकता है जिंदगी का सार भी और स्वर्ग का द्वार भी तथा मृत्यु का काल भी।

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