धनतेरस क्यों मनाया जाता है? धनतेरस का पौराणिक महत्त्व (Importance of Dhanteras)

Dhanteras हिन्दू धर्म का महत्त्वपूर्ण त्योहार माना जाता है, कहते हैं इस दिन धन की वृष्टि होती है अर्थात कुछ विशिष्ट वस्तुएं खरीदने पर धन देवता यानी 'धनवंतरि' देवता प्रसन्न होते हैं और आपको तेरह गुना धन की बढ़ोत्तरी होती है।

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प्रायः लोग इस त्योहार के दिन कई सारे आभूषण,बर्तन इत्यादि खरीदकर इसकी शुभता को बढ़ाते हैं। इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि Dhanteras क्यों मनाया जाता है? Dhanteras का पौराणिक महत्त्व और इतिहास, Dhanteras के बारे में सम्पूर्ण जानकारी में प्रकाश डालेंगे।

Dhanteras Tyohar क्यों मनाया जाता है? Dhanteras का पौराणिक महत्त्व क्या है?

श्रीमदभागवत कथा के अनुसार जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन की प्रक्रिया को संचालित किया, उस प्रक्रिया के बाद अनेकों उपहार प्राप्त हुए उन्हीं उपहारों में से एक महत्त्वपूर्ण उपहार था "अमृत". समुद्र मंथन के दौरान भगवान 'धन्वंतरि' अमृत कलश लिए प्रकट हुए, भगवान धन्वंतरि धन और स्वास्थ्य लाभ के प्रतीक और भगवान नारायण के अवतार माने जाते हैं। जिस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए वह दिन था "कार्तिक माह की त्रयोदशी" इसी दिन को प्रतीक रूप में धनतेरस का त्योहार मनाया जाने लगा। धनतेरस को 'धनत्रयोदशी' भी कहा जाता है।

Dhanteras में किसकी पूजा की जाती है

हमारे देश भारत में भगवान धन्वंतरि को देवताओं के वैद्य के रूप में जाना जाता है, इसीलिए भारत सरकार ने इस दिन को "राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस" मनाने की घोषणा कर चुकी है। कहते हैं स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नही होता है इसीलिए भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है,माता लक्ष्मी भी इसी दिन समुद्र मंथन से धरती लोग में आगमित हुई थी यही कारण है कि धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। माता लक्ष्मी धन और शुभता की प्रतीक हैं और भगवान धन्वंतरि स्वास्थ्य लाभ के प्रतीक हैं दोनो की पूजा करने से पारिवारिक दोष और जीवन सुखमय होता है।

जैन मनाते हैं "धन्य तेरस" या ध्यान तेरस

हिन्दुओं के अलावा इस दिन का महत्त्व जैन धर्म में भी बहुत ज्यादा है जैन मतों के अनुसार इस दिन महावीर स्वामी तृतीय और चतुर्थ ध्यान की मुद्रा में चले जाते हैं और दीपावली के दिन महापरिनिर्वाण की प्राप्ति करते हैं तब से जैनों के लिए बहुत ही खास दिन के रूप में धनतेरस माना जाता है।

इस दिन खरीदारी की है मान्यता

वैसे तो इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है लेकिन इस दिन अनेक मान्यताएं हैं जैसे कि दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर भगवान यमराज की आराधना करने से मृत्यु दोष दूर होते हैं। इस दिन माना जाता है कि बर्तन या कोई भी धात्विक वस्तु खरीदने से धन में वृद्धि होती है,इस दिन बाजार सजे होते हैं और भारत वर्ष में खूब खरीदारी होती है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन धन के रूप में चांदी के बर्तन या वस्तु खरीदने से धन में तेरह गुना की वृद्धि होती है।

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आखिरी शब्द

धनतेरस स्वास्थ्य लाभ और धन वृद्धि का त्योहार है ऐसा माना जाता है कि दीपावली की शुरुवात इसी दिन से हो जाती है, भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी पारिवारिक जीवन में समृद्धि देते हैं अतः मान्यताओं के अनुसार भारत वर्ष में अलग अलग प्रथाएं हैं लेकिन सबका मूल स्वास्थ्य और समृद्धि है।

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